सत् Spirituality & Religion

जीवन कलश

जीवन कलश एक ऐसा कॉन्टेंट है जो जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करता है और पढ़ने वालों को प्रेरित करता है यह ब्लॉक जीवन को सकारत्मक दिशा में ले जाने के लिए एक मार्ग प्रदान करता है मुख्य विषय जीवन कलश का जीवन कलश ब्लॉग पर कई विषयों पर चर्चा की जाती है जिनमें से कुछ प्रमुख विषय है: *मोटिवेशन और प्रेरणा: मोटिवेशन और प्रेरणा दो ऐसे शब्द है जो हमारे जीवन में सफलता की कुंजी है प्रेरणा हमें अपने लक्ष्यो की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करती है जबकि मोटिवेशन हमें अपने लक्ष्यो को प्राप्त करने के लिए आवश्यक ऊर्जा और उत्साह प्रदान करता है *प्रेरणा और मोटिवेशन के स्रोत प्रेरणा और मोटिवेशन के कई स्रोत हो सकते है जिनमें से कुछ प्रमुख स्रोत है: *आत्मविश्वास: आत्मविश्वास हमें लक्ष्यो की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है *सकारात्मक सोच: सकारात्मक सोच हमें अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करती है *लक्ष्य निर्धारण: लक्षण निर्धारण हमें अपने लक्षण की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है *प्रेरक पुस्तकें: प्रेरक पुस्तक हमें अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करती है *प्रेरक व्यक्ति: सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरक व्यक्ति भी प्रमुख भूमिका निभाता है प्रेरणा और मोटिवेशन के कई लाभ हो सकते है, जिनमे से कुछ प्रमुख फायदे है *सफलता: मोटिवेशन और प्रेरणा हमें अपने लक्ष्यों की और बढ़ाने के लिए प्रेरित करते है जिससे हम सफलता प्राप्त कर सकते है *आत्मविश्वास: आत्मविश्वास को बढ़ाने में प्रेरणा और मोटिवेशन का योगदान होता है *उत्पादकता: मोटिवेशन और प्रेरणा हमे अपने काम में उत्पादकता को बढ़ाने मे मदद करते है आत्म सुधार एक ऐसी  प्रक्रिया है जिसमे हम अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए काम करते है यह एक सतक प्रक्रिया है जिसमें  हम अपने विचारो, भावनाओं और व्यवहार में सुधार करने के लिए प्रयास करते है आत्म सुधार के कई लाभ होते है जिनमें कुछ प्रमुख है *आत्मविश्वास में वृद्धि: आत्म सुधार हमें अपने आत्मविश्वास में वृद्धि करने में मदद करता है *व्यक्तिगत विकास: व्यक्तिगत विकास में आत्म-सुधार हमारे जीवन में परिवर्तन लाता है *संबंधो में सुधार: आत्म सुधार हमें अपने संबंधो में सुधार करने में मदद करता है आत्म सुधार के तरीके: कई तरीके आत्म-सुधार में सहयोग करते है *आत्म-विश्लेषण: आत्म-विश्लेषण हमें अपने विचारों भावनाओ, और व्यव्हार को समझने मे मदद करते है *लक्ष्य निर्धारण: लक्षण निर्धारण हमें अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए एक दिशा प्रदान करता है सकारात्मक सोच: सकारात्मक सोच हमें अपने विचारों में सकर्मकता लाने में मदद करती है *व्यक्तिगत विकास कार्यक्रम: व्यक्तिगत विकास कार्यक्रम हमें अपने व्यक्तिगत विकास में मदद करते है आत्म सुधार के लिए सुझाव * नियमित रूप में आत्मक विशेषण करें-नियमित रूप में आत्मा-विशेषण करने से आप अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार को समझने में मदद कर सकते है *लक्ष्य निर्धारण करे: लक्ष्य निर्धारण करने में आप अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए एक दिशा प्रदान कर सकते है *सकारात्मक सोच का प्राभव करे: सकारात्मक सोच का अभ्यास करने से आप अपने विचारों में सकारात्मक लाने में मदद कर सकते है *व्यक्तिगत विकास कार्यक्रम मे भाग ले: व्यक्तिगत विकास कार्यक्रम में भाग लेने से आप अपने व्यक्तिगत विकास में मदद कर सकते है जीवन के अनुभवो की समझ: जीवन को गहराई से समझने का एक मार्ग  सतत प्रक्रिया है जिसमें हम अपने जीवन के अनुभवों को समझने और उनका उपयोग अपने जीवन में सुधार करने के लिए करते है जीवन के अनुभवों की समझ के लाभ जीवन में अनुभवों की समझ के कई लाभ हो सकते है जिनमें कई प्रमुख है:- *आत्मज्ञान- जीवन के अनुभवों की समझ हमें अपने बारे में अधिक जानने में मदद करती है आत्मज्ञान के उदेश्य की समझ सकर्मक सोच व्यक्तिगत विकास जीवन के अनुभवों की समझ के तरीके जीवन के अनुभव की समझ के कई तरीके हो सकते हैं जिनमें से कुछ प्रमुख तरीके है *ध्यान योग: ध्यान योग हमें अपने जीवन के अनुभवों को समझने में मदद करते है *पुस्तक और लेख: पुस्तक और लेख हमें अपने जीवन के अनुभवों को समझने में मदद करते है

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ब्रह्मांड (Universe)

जैसे साइंस ने हमारे सौरमंडल, पृथ्वी, आकाशगंगा और सुपर कलस्टर इत्यादि थे आम तौर पर गुरुत्वाकषर्ण  से बंधे होते है। कुछ आकाशगंगा समूह 200 मिलियन प्रकाश वर्ष तक फैले होते है। यदि हम पीपल रूपी उल्टे वृक्ष के मैप के अनुसार सभी पत्तों में हमारा भी एक पत्ता रूपी ब्रह्मांड वैसे तो अनेकों पत्ते और अनेको ब्रह्मांड है। जिसकी अपनी समय अवधि होती है। जैसे एक समय के बाद पतझड़ में वृक्षों के पत्ते झड़ जाते है। वैसे ही ब्रह्मांड रूपी पत्ता संसार रूपी वृक्ष से नष्ट हो जाता है। फिर दूसरा ब्रह्मांड (पत्ता) का विस्तार होता है। जिसमे दुबारा से ग्रह, सौरमंडल, आकाशगंगा, आकाशगंगा समूह बनते है और जीवन पनपता है। फिर यू  ही जीवन चक्कर चलता रहता है। एक अनंत और रहस्यमय  विस्तार ब्रह्मांड हमारे अस्तित्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसके बारे में जानना हमारे लिए बहुत रोचक हो सकता है। ब्रह्मांड का रहस्यमय  विस्तार है। जिसके अरबो गलैक्सिया, तारे और ग्रह है। इस लेख में हम ब्रह्मांड के बारे में कुछ रोचक तथ्यों और अवधारणाओं पर चर्चा करेंगे। ब्रह्मांड का आकार और विस्तार ब्रह्मांड के आकार और विस्तार एक बहुत ही जटिल और रहस्यमय विषय है। वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार ब्रह्मांड का व्यास  लगभग ९३ अरब  प्रकाश  वर्ष  है। और इसका आयतन लगभग 4. 2*10 ^ 80 मीट ^ 3 है। लेकिन यह आकार और विस्तार अभी भी एक अनुमान है। और वैज्ञानिकों को अभी भी इसके बारे में बहुत कुछ सीखना है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक बहुत रोचक और जटिल विषय है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ब्रह्मांड लगभग 13.8 अरब वर्ष पूर्व एक महाकाय विस्फोट से उत्पन्न  हुआ था। जिसे बिग बैंग भी कहा जाता है इस विस्फोट से पहले ब्रह्मांड एक बहुत ही गर्म और घने अवस्था में था। और इसके बाद ही है विस्तारित होना शुरू हुआ। ब्रह्मांड का रहस्य ब्रह्मांड में बहुत सारे रहस्य है। जो अभी भी वैज्ञानिकों को आकर्षित करते हैं। इनमें कुछ प्रमुख रहस्य है: डार्क मैटर : एक प्रकार का पदार्थ है। जो ब्रह्मांड में व्यापत है लेकिन इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। डार्क एनर्जी: यह एक प्रकार की ऊर्जा है। जो ब्रह्मांड के विस्तार को बढ़ावा देती है। लेकिन इसका भी कोई प्रत्याशी प्रमाण नहीं है। ब्लैक होल्स : यह एक प्रकार के खगोलिय पिंड है। जो इतने घने होते है। कि उनके गुरुत्वाकपर्ण  से कुछ भी बच नहीं सकता है। ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी, अन्य ग्रह और उपग्रह है। जो एक दूसरे के गुरुत्वाकपर्ण  बल से ठीके हुए है। यदि हम अपने पृथ्वी के विस्तार की बात करें तो यह भूमधय रेखा के चारों ओर उसका विस्तार 40 हजार 75 किलोमीटर तक फैला है। हमारी पृथ्वी से चांद की दूरी 3 लाख  84 हजार किलोमीटर बताई गई है। जो हमारी पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता हुआ। पूरे सौरमंडल के साथ गैलेक्सी के चारों और चक्कर लगाता है। हमारे तोर (सूर्य) से हमारे पृथ्वी की दूरी 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर है। पृथ्वी हमारे तारो के चारों ओर चक्कर लगाकर गैलेक्सी (आकाशगंगा) में घूम रही है। हमारे सौरमंडल में अनेकों ग्रह है जो सूर्य (तारो) के साथ आकाशगंगा के ब्लैक होल का चक्कर लगा रहे है। यदि हम अपने सौरमंडल और उसमें अनेकों ग्रहों की बात करे तो। हमारा सौरमंडल विज्ञान के अनुसार एक लाइट ईयर बड़ा है। पूरे लाइट ईयर में साइंस कहती है। करीब 95 खराब किलोमीटर होते है। यानि एक वर्ष में लाइट कितनी  दूरी तय करती है। उसको लाइट ईयर कहते हैं एक लाइट ईयर में प्रकाश  9.46 बिलियन किलोमीटर की दूरी तय करती है 94.60 या  95 खराब किलोमीटर भी कह सकते है। हमारे पृथ्वी सूर्य के चारो ओर 30 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चक्कर लगाती है। और अपने अक्ष पर 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है। पृथ्वी अन्य ग्रह और सूर्य, हमारी आकाशगंगा के केंद्र के चारों और लगभग 200 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार में परिक्रमा कर रहे है। जिसमें अन्य चंद्रमाओं और शुद्ध ग्रह के साथ मिल्की वे आकाशगंगा के केंद्र का चक्कर लगाता है। इसके बाद हमारी मंदाकिनी आकाशगंगा अपने समूह की आकाशगंगा के साथ ब्रह्मांड में चक्कर लगाती रहती है। इसका समय बहुत लंबा है जो अरबो-खरबो वर्ष है। और रफ्तार भी बहुत ज्यादा है। निष्कर्ष :- अब निष्कर्ष की बात कर तो हमारे जो वेद शास्त्रों ने जो संसार रूप उल्टे वृक्ष का नक्शा (मैप) बताया है। उसके एक पत्ते में इतना मैटर है जो युगो-युगो से चलाता जा रहा है। ब्रह्मांड के रहस्यो को समझने से हमें अपने अस्तित्व के बारे में अधिक जानने में मदद मिल सकती है। हमारे सारे ग्रह, सौरमंडल, आकाशगंगा समूह को ग्रन्थों-शास्त्रों ने संसार रूपी वृक्ष के एक पत्ता रूप बताया है। साइंस के अनुसार भी मल्टीयर यूनिवर्स है। जो अनेकों पत्तो रूपी ब्रह्मांड के विस्तार के रूप में वर्णन किया गया है।

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Spiritual Knowledge in Vedanta Philosophy

अध्यात्म तत्व ज्ञान क्या है?

वेदांत दर्शन  और शास्त्रों के माध्यम से जो तत्व ज्ञान  प्राप्त होता है, उसे जीवन का आद्यात्मिक सत्य   कहा जाता है। अद्यातम तत्व ज्ञान  प्रत्येक जीव का सवोत्तम लक्ष्य है। इसी ज्ञान  के माध्यम से ही संसार के भवसागर में भटक रही प्रत्येक जीव की आत्मा का कल्याण संभव है। वैसे तो संसार में प्रत्येक जीव कर्म  और भोग के चक्कर में उलझा रहता है। माया (प्रक्रति ) के तीन गुण – सतोगुण, रजोगुण, और तमोगुण – जीव की आत्मा को प्रत्येक जुनी  में फंसाए रखते हैं। 84 लाख जुनी में मनुष्य , पशु, पक्षी, पेड, देवता, राक्षस, पितर अन्य जीव आदि | सभी अपने-अपने लोक में कर्म  और भोगो  में लिप्त  हैं। हालाँकि मनुष्य  भी कर्म  और भोगो  में उलझा हुआ है, लेकिन मनुष्य जुनी में  वह हमारे शास्त्रों के अनुसार  इससे  पार होकर परमात्मा (मोक्ष) को प्राप्त कर सकता है। अन्य जुनियों में ऐसा  नही  हो सकता। यदि  हम अध्यात्म के तत्व ज्ञान  की बात करें, तो हमें अपने  शास्त्रों से जीवन  में अनेको  प्रकार का ज्ञान मिलता  है। पवित्र  शास्त्र हमें  बताते हैं की  हम अपने  जीवन को कैसे चलाएं, अच्छे कर्म  कैसे करें, और किस  प्रकार से जीवन व्यतीत करें। इस  ज्ञान  के माध्यम से मनुष्य  का जीवन  सरल और सुखमय  बन  सकता है। दूसरा आत्मतत्व ज्ञान , जो हमें महापुरुषों, संतों और वेदांत दर्शन  शास्त्रों से प्राप्त होता है, वह परमात्मा को तत्वरूप में जानने का ज्ञान  है। यह ज्ञान यह  समझने में मदद करता है कि  परमात्मा कोन  है? वह कोनसा  सा परमात्मा है, जो समय (काल) से बाहर है। जब जीव संसार के भवसागर में भटकता रहता  है, तो वह अपने जीवन के  अंतिम समय  में उस परमात्मा को याद  करता हुआ मोक्ष प्राप्त कर सकता है और सतलोक में अपनी  आत्मा को आनंदित  कर सकता है। प्रत्येक जीव का कर्म  और भोगों का चक्कर चलता रहेगा। यह  चक्कर कब से चल रहा है और कब तक चलेगा, इसका कोई अनुमान नही है। लेकिन मनुष्य  को परमात्मा का आत्मतत्व ज्ञान प्राप्त हो सकता है। यही  कारण है कि मनुष्य का जीवन  अन्य सभी जीवों की तुलना विशेष  है। इस जुनी में केवल मनुष्य को समझ और विवेक  है। वेदांत शास्त्रों को पढकर और संतों का संग करके,मनुष्यअपने  जीवन को कर्म  और भोगों के चक्र से मुक्त कर सकता है। यह  एक प्रसिद  कहावत है – “संग का रंग”, जो यह  बताती है कि संग का प्रभाव प्रत्येक जीव पर होता है। प्रत्येक जुनी में हर जीव  कर्म  करके अपने  जीवन  को चलाता है। लेकिन  हर जीव को खुदमुखत्मार और मोक्ष का मार्ग नही  मिलता । मनुष्य  के अलावा, सभी जुनियों में जीव  केवल कर्म  और भोगों के अनुसार अपना जीवन बिताती  रहती हैं। प्रत्येक जीव की आत्मा संसार के भवसागर में उलझी हुई है, और वह तरह-तरह की दुःख  और पीडा सहन करती रहती  है। जन्मों और जन्मांतरों के चक्कर में वह फंसा रहता है। इसी कारण से 84 लाख जुनियों में जीव की आत्मा समय  (काल) की अवधि में लगातार चक्कर लगाती रहती हैं। सभी जीवों को उनका समय  पूरा होने पर  दूसरे जन्म में आत्मा को शरीर मिलता  है। फिर  वही कमों का चक्कर और  भोगों में आत्मा लिप्त  रहती है। यदि जीव मनुष्य जीवन के दोरान अछे कर्म नही  करता और परमात्मा का  करता, तो उसे अपने जीवन के अंतिम समय के बाद ८४ लाख जुनियों के चक्कर में फंसा रहना पडता है। इसके बाद, दुःख- पीड़ा में आत्मा तरह- तरह जुनियों में जन्म लेकर जन्म लेकर कर्मों  के भोग भुगतती रहती है। अध्यात्म, भोतिकता से परे जीवन का अनुभव कराने का मार्ग है | यह व्यक्ति को अपने अस्तित्व के बारे में बताता है  और ईश्वरीय आनंद की अनुभूति कराता है |जब व्यक्ति आद्याय्त्मिक ज्ञान प्राप्त करता है, तो उसकी ईष्या, द्वेष, घृणा, और आपसी भेदभाव जैसी भावनाएं समाप्त हो जाती हैं। इसके परिणाम स्वरूप व्यनि को शाश्वत आनंद और शांति प्राप्त होती है। अध्यात्म हमें आत्मज्ञान (तत्वज्ञान) के बारे में बताता है। यह हमें  समझने में मदद करता है कि इस संसार से परे परमात्मा का स्थान कहां है, परमात्मा को पाना क्यों जरूरी है, और परमात्मा को कैसे पाया जा सकता है। और संसार से परे कोन है वह परमात्मा जिसे जानकर मनुष्य अपनी आत्मा को उस  ईश्वर के समीप पहुंचा सकता है। इसके साथ मोक्ष का स्थान भी स्पष्ट किया जाता है। मोक्ष वह अवस्था है, जहां जीव के सभी बंधन समाप्त हो जाते हैं, और आत्मा परमात्मा में विलीन होकर शाश्वत शांति प्राप्त करती है। भगवद गीता के अनुसार , संसार रूपी वृक्ष का उर्ध्ममूल (ऊपर की जड) वह परम अक्षर ब्रह्म है| जिसे सच्चिदानंद  ब्रह्मा, “The Supreme Power of God,” एक ओंकार, इल्लिला  और सर्वशक्तिमान के रूप में जाना जाता है। वह परमात्मा सत्पुरुष (सत्) के नाम से भी प्रसिद है। इसके नीचे तना रूप में जो अवस्था है | उसे ‘अक्षर ब्रह्म’, ‘तत्पुरुष’, ‘Truth God’ अल्ला  कहा जाता है। इस ब्रह्म का नाम ध्यान  (‘तत्’) होता  है। वृक्ष के तना अवस्था के नीचे  है, उस अवस्था को   डारों रूपी अवस्था होती है जिसमे अनेकों छर ब्रह्म (छर पुरुष ) होते है | जिनको सदाशिव , महाविष्णु , निरंजन , ला , God, भी कहते है | ऐसे ब्रह्म का ध्यान ‘ॐ’ होता है डारों अवस्थाओं के नीचे , शाखाओ अवस्थाओ  का स्थान  होता है |  जिनको तीनो बड़े देव’ ब्रह्मा (रजोगुण ), विष्णु (सतोगुण ), महेश ( तमोगुण ) ‘ के रूप में विस्तार है  | जिनको  इलेक्ट्रोन , प्रोटोन , न्यूट्रॉन    भी कहते है | जिनका ध्यान ॐ नम शिवाय , ॐ नमो. भगवते वासुदेवाये नम , ॐ ब्रह्म्ने नम  इत्यादी                                                                                                                                          शाखाओं से  नीचे  अवस्थाएं  अनेकों  पतों रूप में  हैं |  जो भोतिक संसार भवसागर  कर्म  और भोगो  के चक्र में उलझे हुए हैं। इनमे  छोटे देवताओं जैसे इंद्र, वायु , अनि, जल, ,सूर्य , देवता, और  लाखों  जुनियों के जीवों के शरीर शामिल  हैं। इसी प्रकार, पृथ्वी, सौरमंडल, आकाशगंगा, ब्रह्मांड इत्यादी  भी संसार रूपी वृक्ष के पत्तों में समाहित  हैं। इन पत्तों में से एक पत्ता इतना विशाल  है कि उसमें हमारी पृथ्वी, सौरमंडल, अनेकों आकाशगंगा, और ब्रह्मांड में  समाएं हुए  हैं। कबीर दास जी का दोहा अक्षर पुरुष

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